मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

बुधवार, 1 अक्टूबर 2014

रेल हादसे और सबक

                                                             भारतीय रेलवे की दुर्घटनाओं की श्रंखला में एक बार फिर से गोरखपुर में पटरी से उतरी बरौनी एक्सप्रेस के डिब्बे से कृषक एक्सप्रेस की टक्कर होने के बाद सुरक्षा सम्बन्धी चिंताएं सामने आने लगी हैं. देश क्या पूरी दुनिया में ही इस तरह की दुर्घटनाएं होती रहती हैं जिनमें किसी एक पटरी पर दुर्घटनाग्रस्त हुई सवारी या मालगाड़ी की टक्कर दूसरी गाड़ी से हो जाने पर इस तरह से भयावह दुर्घटना हो जाया करती है. रेलवे परिचालन में इस तरह से डिब्बों के पलट जाने के कई कारण होते हैं पर व्यस्त भारतीय रेल नेटवर्क के पास अभी तक कोई ऐसा तंत्र विकसित नहीं हो पाया है जिसके माध्यम से दोहरी पटरी पर हुई दुर्घटनाओं के बारे में समय रहते पता लगाया जा सके और दूसरी पटरी पर आने जाने वाली गाड़ियों को ट्रैक साफ़ होने तक चेतावनी जारी कर रोका जा सके ? भारतीय परिदृश्य में यह स्थिति तब और भी विकट हो जाती है जब क्षमता से अधिक भरी हुई सवारी गाड़ियां इस तरह से दुर्घटना की शिकार हो जाती हैं.
                                                             इस बारे में अब भारतीय रेल और वैज्ञानिकों को इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए कुछ करना ही होगा और यदि संभव हो तो धरातलीय नेटवर्क के साथ ही पूरे रेल परिचालन को उपग्रह के माध्यम से निगरानी के अंतर्गत भी लाने का प्रयास किया जाना चाहिए. कई बार किसी गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने पर उसके चालक व गार्ड भी जख्मी हो जाते हैं तो उस स्थिति में अधिकारियों या अगले स्टेशन तक किसी भी तरह की सूचना भी नहीं पहुँच पाती है और दूसरी पटरी पर आती हुई किसी अन्य गाड़ी के टकरा जाने से दुर्घटना का स्वरूप और भी वीभत्स हो जाता है. यदि गाड़ियों में कोई ऐसा टक्कर रोधी यंत्र लगा हो जो किसी भी तरह के कारणों से गाड़ी के पटरी पर असामान्य तरीके से रुकने या दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में दूसरी पटरी पर आने वाली गाड़ी के चालक को सूचित कर सके तो पूरी व्यवस्था में दुर्घटना के स्तर और तीव्रता को भी कम किया जा सकता है.
                                                          भारतीय रेल अपने आप में बहुत बड़ा नेटवर्क है और अब समय आ गया है कि इसके परिचालन में उपग्रह आधारित किसी भी सेवा की संभावनाओं को टटोला जाए और उसके अनुरूप हर एक गाड़ी पर उसी तरह से नज़र रखने का क्रम शुरू किया जाये जैसे हवाई यातायात पर नियंत्रण रखा जाता है. आज भारतीय रेल ने जिस तरह से अपनी सभी गाड़ियों के बारे में ताज़ा और सटीक जानकारी देने का तंत्र विकसित कर लिया है यदि उसका भी इस तरह से उपयोग किया जाये तो हर एक गाड़ी के वास्तविक चाल और अनावश्यक रुकने पर पूरी नज़र रखी जा सकती है. कम से कम दो स्टेशनों के बीच चल रही हर गाड़ी के परिचालन की जानकारी के मुहैय्या होने के बाद अब इस बात पर ध्यान दिया जा सकता है कि इंजन में जीपीएस आधारित यंत्र लगाये जाएँ तो गाड़ी की सही स्थिति के बारे में बताते रहें और हर गाड़ी के चालक को अगले कुछ किलोमीटर के ट्रैक के बारे में लाइव जानकारी देते रहें जिससे किसी भी तरह के अवरोध के होने पर दूसरी गाड़ियों के चालक अपने गति को नियंत्रित करने या गाड़ी रोकने के बारे में फैसला कर पाने में सक्षम हो सकें.रेल हादसे और सबक       
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मंगलवार, 30 सितंबर 2014

पेट्रोलियम सब्सिडी और सरकार

                                                                         देश के पेट्रोलियम बाज़ार को अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने की पिछली संप्रग सरकार की कवायद काफी हद तक पूरी होती दिखाई दे रही है और उसका भरपूर लाभ अब देश को मिलने वाला है क्योंकि जिस तरह से पिछले वर्ष जनवरी माह में डीज़ल को नियंत्रण मुक्त करने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए संप्रग सरकार ने तक तक प्रति माह ५० पैसे की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया था जब तक सब्सिडी का बोझ न खत्म हो जाये वह नयी सरकार के आने के बाद भी अपनी गति से जारी रहा है. सितम्बर माह की शुरुवात में जिस तरह से ५० पैसे की बढ़ोत्तरी करने के बाद डीज़ल पर केवल पांच पैसे की सब्सिडी ही शेष रह गयी थी तो उसके बाद इस बात की अटकलें लगायी जा रही थीं कि आने वाले समय में सरकार इसे भी बाज़ार के मूल्यों से जोड़ सकती है पर पूरे महीने लगभग ४५ पैसे प्रति लीटर का लाभ लेने के बाद भी सरकार अपने वायदे को पूरा करने से बच रही है और संभवतः पीएम की यात्रा से लौटने के बाद ही इस पर कोई फैसला ही पायेगा.
                                                           सरकार ने जिस तरह से पूरे महीने लाभ की स्थिति को बनाये रखा व उसके हित में था क्योंकि पूरे देश में ४५ पैसे प्रति लीटर का लाभ कितना बड़ा होगा इस बात का अंदाज़ा सरकार को भी नहीं है. अब १ अक्टूबर को समीक्षा में डीज़ल को भी पूरी तरह से बाज़ार आधारित करने के बारे में सोचा जाना चाहिए न कि एक महीना और इसका लाभ उठाया जाना चाहिए वैसे भी हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों से पहले सरकार इस बात का लाभ उठाना चाहेगी कि पेट्रोलियम पदार्थों के दाम घटने लगे हैं. इस बड़ी जंग के बाद भारत की आर्थिक स्थिति को और भी अधिक मज़बूत करने के लिए अब सरकार को घरेलू गैस के बारे में भी इसी तरह की नीति बनाने की आवश्यकता है और उस पर हर महीने कम से कम १० रूपये की बढ़ोत्तरी लागू की जानी चाहिए जिससे आने वाले समय में इस सब्सिडी का बोझ भी सरकार को कम से कम ही उठाना पड़े.
                                                           पेट्रोलियम पदार्थों में अब केवल घरेलू गैस और केरोसिन पर ही सब्सिडी का बोझ बचा है जिसे जल्द ही कम से कम स्तर तक लाने की आवश्यकता भी है क्योंकि जब तक सरकार पर अनावश्यक रूप से पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम नहीं किया जायेगा तब तक सही दिशा में किये जाने वाले कोई भी प्रयास पूरा फल देते हुए नहीं दिखाई देने वाले हैं. इस बारे में स्पष्ट बहुमत वाली वर्तमान सरकार को अब स्पष्ट और मज़बूत इरादों के साथ नीतियों का निर्धारण करना ही होगा क्योंकि आर्थिक क्षेत्र से जुडी हुई नीतियों पर अलोकप्रिय कदम होने के बाद भी पिछली गठबंधन सरकार ने देश के हित में इस तरह के क़दमों का पूरा समर्थन करते हुए उन्हें लागू करने की दिशा में भरपूर कोशिशें भी की थीं जिनका प्रतिफल आज सबके सामने है. अब देश की राजनीति को इस तरह के हथकंडों से बाहर निकल कर देश हित में कड़े काम उठाने की तरफ बढ़ने की आवश्यकता है जिससे आने वाले समय में कोई भी दल सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में लोकलुभावन नीतियों के दम पर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान न पहुंचा सके.          
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कर्म से चिकित्सक और बहुत कुछ करने की आशा के साथ जीवन की अनवरत यात्रा पर बढ़ने का क्रम जारी.....

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